H-1B Worker Visa

Trump Policy का झटका: H-1B Worker Visa पर $1,00,000 फीस, Tata और Infosys पर सीधा असर

सोचिए, आपने सालों की पढ़ाई और मेहनत के बाद US में नौकरी का सपना देखा हो, और अचानक US Visa इतना महंगा हो जाए कि कंपनियां ही पीछे हटने लगें। Trump Policy के तहत H-1B Worker Visa पर प्रस्तावित $1,00,000 की भारी-भरकम फीस ने India की IT इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। सबसे ज्यादा असर Tata, Accenture, Cognizant, HP और Infosys जैसी दिग्गज IT कंपनियों पर पड़ता दिख रहा है।

H-1B Worker Visa क्या है और क्यों है इतना अहम?

H-1B Worker Visa वो रास्ता है, जिससे हजारों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स US में काम करते हैं। खासतौर पर Tata, Infosys, TCS और Wipro जैसी कंपनियां इसी Visa के जरिए अपने इंजीनियर्स को क्लाइंट साइट्स पर भेजती हैं।
अब Trump Policy के तहत अगर हर H-1B Worker पर $1,00,000 (करीब 83 लाख रुपये) फीस लगती है, तो ये सिर्फ कागजी बदलाव नहीं, बल्कि भारत को एक बड़ा आर्थिक झटका है।

Indian IT Companies पर सबसे ज्यादा दबाव क्यों?

  1. Project Cost सीधे बढ़ेगी

Tata, Infosys, Cognizant Technology जैसी कंपनियों के पास US में हजारों H-1B कर्मचारी हैं। इतनी बड़ी फीस का मतलब प्रोजेक्ट की लागत का कई गुना बढ़ना और मुनाफा घटने का खतरा।

  1. Business Model पर सवाल

अब तक India की IT कंपनियां “onsite And offshore” मॉडल पर चलती थीं। US Visa महंगा होगा तो कंपनियों को कर्मचारी onsite भेजना मुश्किल होगा। इसका सीधा असर क्लाइंट डिलीवरी और कॉन्ट्रैक्ट प्राइसिंग पर पड़ेगा।

  1. US Clients का दबाव

US की कंपनियां पहले से ही लागत कम करना चाहती हैं। अगर Tata, Accenture, Cognizant, HP और Infosys जैसी दिग्गज IT कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत क्लाइंट पर डालेंगी, तो डील हाथ से निकलने का भी खतरा है।

Trump Policy का असली मकसद क्या है?

Trump Policy का फोकस साफ है- “America First.” इस नीति का मकसद है US कंपनियों को स्थानीय टैलेंट हायर करने के लिए मजबूर करना और विदेशी वर्कर्स पर निर्भरता कम करना। लेकिन इसका साइड इफेक्ट India के IT सेक्टर को झेलना पड़ सकता है।

Indian Professionals की जेब पर क्या असर?

ये खबर सिर्फ Tata, Accenture, Cognizant, HP और Infosys Indian IT कंपनियों तक सीमित नहीं है।

  • US जाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए रास्ता और मुश्किल होगा
  • Salary negotiations पर असर पड़ेगा
  • कई मामलों में कंपनियां onsite की जगह remote या India-based डिलीवरी को प्राथमिकता देंगी

यानी H-1B Worker Visa अब सिर्फ स्किल का नहीं, बजट का भी खेल बनता जा रहा है।

India की IT इंडस्ट्री के पास क्या विकल्प हैं?

कंपनियां अब तीन रास्तों पर सोच सकती हैं:

  • US में लोकल हायरिंग बढ़ाना
  • Automation और AI पर ज्यादा निवेश
  • Europe, Middle East जैसे नए मार्केट्स पर फोकस

Tata और Infosys पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा रही हैं, लेकिन ये बदलाव रातों-रात नहीं होंगे।

Trump Policy का $1,00,000 H-1B Worker Visa फीस प्रस्ताव सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि India की IT इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी है। सवाल ये है क्या Tata और Infosys जैसे दिग्गज इस झटके को नए मौके में बदल पाएंगे, या फिर US सपना और महंगा होता चला जाएगा?

FAQs (Frequently Asked Questions)


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